नई उमंग नया तरंग और खुशहाली लायी है
जीवन की नीरसता में फिर से बजती सहनाई है
आज दिनों के बाद यहाँ फिर पहली बारिश आयी है
क्या कहना उस यौवन का जब पहली बूँद ने छुआ उसे
क्या कहना अपने मन का जब ली उसने अंगराई है
सरम - लाज को छोड़ आज उसने उधम मचाई है
आज दिनों के बाद यहाँ फिर पहली बारिश आयी है
ऐसी बरसी आज धरा पे रुकने का कोई नाम नहीं
जाने कितने जनमों से वो रूकती रूकती आई है
सब्र का बांध है टुटा उसका उसपे मस्ती छाई है
आज दिनों के बाद यहाँ फिर पहली बारिश आयी है
आज धरा की प्यास बुझेगी और खिलेंगे नव उपवन
उसने भी तो इन्तेजार मैं अपनी उम्र गवाई है
हुआ मिलन इन दोनों का और धरा मुस्काई है
आज दिनों के बाद यहाँ फिर पहली बारिश आयी है
देख रहा मैं उनके मिलन को भाव मे बहता जाता हूँ
इसी भाव में अपने मान में चार पंक्तिया आई है
आज दिनों के बाद यहाँ फिर पहली बारिश आयी है
आज दिनों के बाद यहाँ फिर पहली बारिश आयी है
